4. इलेक्ट्रिक ऊर्जा मापना (EE 3003)

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4. इलेक्ट्रिक ऊर्जा मापना

4.1 सिंगल और तीन-फेज़ इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा मीटर: निर्माणात्मक विशेषताएँ और कार्य सिद्धांत

ऊर्जा मीटर वह उपकरण होते हैं जो किसी लोड द्वारा उपभोग की गई विद्युत ऊर्जा को मापते हैं। ये मीटर आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक होते हैं, जो माइक्रोप्रोसेसर या डिजिटल सर्किट्स का उपयोग करके ऊर्जा मापते हैं।


सिंगल-फेज़ इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा मीटर
  • निर्माणात्मक विशेषताएँ:
    • माइक्रोकंट्रोलर/IC आधारित डिज़ाइन: आधुनिक सिंगल-फेज़ मीटर माइक्रोकंट्रोलर या आईसी का उपयोग करते हैं, जो ऊर्जा उपभोग की गणना और प्रदर्शित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
    • सेंसिंग एलिमेंट्स: करंट ट्रांसफॉर्मर (CT) से करंट मापने के लिए और पोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर (PT) से वोल्टेज मापने के लिए सेंसर्स होते हैं।
    • डिजिटल डिस्प्ले: ऊर्जा खपत को किलवाट-घंटे (kWh) में डिजिटल डिस्प्ले पर प्रदर्शित किया जाता है।
    • पावर सप्लाई: यह मीटर लाइन वोल्टेज से संचालित होते हैं, और माप सर्किट को शक्ति देने के लिए एक छोटा पावर सप्लाई उपयोग करते हैं।
  • कार्य सिद्धांत:
    • मीटर वोल्टेज और करंट सिग्नल्स को निरंतर मॉनिटर करता है।
    • वोल्टेज को सीधे लाइन से लिया जाता है और करंट को CT से मापा जाता है।
    • माइक्रोकंट्रोलर इन दोनों को गुणा करता है (P = V × I) और समय के साथ ऊर्जा का संकलन करता है।
    • संचित ऊर्जा को किलवाट-घंटे (kWh) में प्रदर्शित किया जाता है।

तीन-फेज़ इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा मीटर
  • निर्माणात्मक विशेषताएँ:

    • तीन करंट ट्रांसफॉर्मर (CTs): प्रत्येक फेज के लिए एक CT का उपयोग किया जाता है, ताकि तीन-फेज़ प्रणाली के करंट को मापा जा सके।
    • तीन वोल्टेज इनपुट: प्रत्येक फेज के लिए एक वोल्टेज सेंसर कनेक्ट किया जाता है।
    • माइक्रोकंट्रोलर/IC आधारित माप प्रणाली: यह भी सिंगल-फेज़ मीटर की तरह काम करता है, जिसमें एक माइक्रोकंट्रोलर या आईसी द्वारा डेटा प्रोसेस किया जाता है।
    • डिजिटल डिस्प्ले: ऊर्जा खपत को किलवाट-घंटे (kWh) में प्रदर्शित किया जाता है।
  • कार्य सिद्धांत:

    • यह मीटर तीनों फेज़ के लिए वोल्टेज और करंट मापता है।
    • फिर, प्रत्येक फेज़ की इंस्टेंटेनियस पावर की गणना की जाती है: P=Vphase×Iphase×cos(ϕ)P = V_{\text{phase}} \times I_{\text{phase}} \times \cos(\phi) जहां ϕ\phi वोल्टेज और करंट के बीच का फेज़ कोण है।
    • इसके बाद, कुल ऊर्जा खपत को किलवाट-घंटे (kWh) में संग्रहीत किया जाता है।

सिंगल-फेज़ और तीन-फेज़ ऊर्जा मीटर के बीच मुख्य अंतर:

  • सिंगल-फेज़ मीटर केवल एक फेज़ लोड की ऊर्जा खपत मापता है, जबकि तीन-फेज़ मीटर तीन-फेज़ लोड की कुल ऊर्जा खपत मापता है।
  • तीन-फेज़ मीटर आमतौर पर औद्योगिक सेटिंग्स में उपयोग होते हैं, जबकि सिंगल-फेज़ मीटर घरेलू और छोटे वाणिज्यिक उपयोग के लिए होते हैं।

4.2 मीटरों में होने वाली गलतियाँ और उनकी क्षतिपूर्ति

ऊर्जा मीटरों में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं, जो माप की सटीकता को प्रभावित करती हैं। इन त्रुटियों को सुधारने के लिए विभिन्न क्षतिपूर्ति विधियाँ होती हैं।

ऊर्जा मीटर में होने वाली गलतियाँ:
  1. सिस्टमेटिक (पूर्वानुमेय) गलतियाँ:

    • गलत कैलीब्रेशन: यदि मीटर को सही ढंग से कैलीब्रेट नहीं किया गया हो, तो मीटर वास्तविक ऊर्जा खपत से अधिक या कम दिखा सकता है।
    • तापमान प्रभाव: इलेक्ट्रॉनिक घटक तापमान में परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिसके कारण माप गलत हो सकते हैं।
    • पावर फैक्टर त्रुटियाँ: मीटर केवल वास्तविक शक्ति मापते हैं, और अगर पावर फैक्टर में बहुत अधिक परिवर्तन होता है, तो मीटर में त्रुटियाँ आ सकती हैं।
  2. रैंडम (अनियमित) गलतियाँ:

    • यह त्रुटियाँ अज्ञात और अप्रत्याशित होती हैं। उदाहरण के लिए:
      • विधुत प्रणाली में शोर: शोर के कारण मीटर के माप में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
      • लोड में उतार-चढ़ाव: लोड में किसी प्रकार का परिवर्तन होने पर भी ऊर्जा मीटर की माप में त्रुटियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  3. फेज़ कोण त्रुटियाँ:

    • तीन-फेज़ मीटर में यह त्रुटि तब हो सकती है जब वोल्टेज और करंट के बीच फेज़ कोण को सही तरीके से मापा न जाए, खासकर जब लोड असंतुलित हो।
    • समाधान: सही फेज़ कोण के लिए करंट और वोल्टेज सेंसर्स की सही जाँच और माइक्रोप्रोसेसर आधारित अल्गोरिदम द्वारा त्रुटि सुधार की जा सकती है।
  4. गैर-रेखीय (Non-linearity) त्रुटियाँ:

    • मीटर बहुत कम या बहुत अधिक लोड पर रैखिक नहीं हो सकते हैं, जिससे त्रुटियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
    • समाधान: मीटर को विभिन्न लोड्स और पावर फैक्टर स्थितियों के लिए कैलिब्रेट करना चाहिए ताकि इन त्रुटियों को कम किया जा सके।
क्षतिपूर्ति विधियाँ:
  1. कैलीब्रेशन:

    • नियमित कैलिब्रेशन ऊर्जा मीटर के लिए आवश्यक होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मीटर सही माप प्रदान कर रहा है। कैलिब्रेशन में मीटर को एक मानक ऊर्जा मान के साथ तुलना किया जाता है और यदि आवश्यक हो, तो उसे समायोजित किया जाता है।
    • कैलिब्रेशन को विभिन्न लोड और पावर फैक्टर स्थितियों में किया जाना चाहिए ताकि मीटर के सभी संभावित कार्य स्थितियों के लिए सटीकता सुनिश्चित हो सके।
  2. तापमान क्षतिपूर्ति:

    • इलेक्ट्रॉनिक घटक तापमान में परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसके लिए तापमान सेंसर्स का उपयोग किया जा सकता है, जो तापमान को मापकर सॉफ़्टवेयर के माध्यम से त्रुटियों को सुधारते हैं।
  3. फेज़ कोण क्षतिपूर्ति:

    • तीन-फेज़ प्रणाली में फेज़ कोण त्रुटियों को कम करने के लिए फेज़ संतुलन की जांच की जाती है और माइक्रोप्रोसेसर द्वारा इन त्रुटियों का स्वचालित सुधार किया जाता है।
  4. पावर फैक्टर क्षतिपूर्ति:

    • कई आधुनिक मीटर स्वचालित रूप से पावर फैक्टर में होने वाले परिवर्तनों को सुधारते हैं। इसके लिए मीटर वास्तविक शक्ति (Real Power) की गणना करता है, न कि केवल सापेक्ष शक्ति (Apparent Power) को मापता है।
  5. त्रुटि निगरानी और स्व-निदान:

    • कई आधुनिक ऊर्जा मीटर में स्व-निदान (self-diagnosis) की सुविधा होती है, जो मीटर की प्रदर्शन की निगरानी करता है और त्रुटियों का पता लगाता है। ये मीटर स्वयं-शुद्धिकरण के लिए अल्गोरिदम का उपयोग करते हैं।

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