Unit 5: गंदे पानी की विशेषताएँ और उसका शोधन (Characteristics and Treatment of Sewage)

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🔷 5.1 गंदे पानी का विश्लेषण (Analysis of Sewage)

✅ 5.1.1 गंदे पानी की विशेषताएँ

गंदे पानी में तीन प्रकार की विशेषताएँ होती हैं:

1. भौतिक (Physical):

  • रंग (Colour): ताजा सीवेज ग्रे होता है, पुराना काला।

  • गंध (Odour): सड़ने के कारण दुर्गंध आती है।

  • तापमान: वायुमंडलीय तापमान से थोड़ा अधिक।

  • ठोस पदार्थ: तैरते हुए, घुले हुए और तल में बैठने वाले।

2. रासायनिक (Chemical):

  • pH स्तर: 6 से 8 के बीच।

  • जैविक पदार्थ: वसा, प्रोटीन, शर्करा।

  • अकार्बनिक पदार्थ: लवण, खनिज आदि।

3. जैविक (Biological):

  • हानिकारक जीवाणु, वायरस, परजीवी और कीटाणु होते हैं।

  • ये सूक्ष्मजीव गंदगी को सड़ाते हैं।


✅ 5.1.2 बी.ओ.डी. (BOD) और इसका महत्व

  • BOD (Biochemical Oxygen Demand) वह ऑक्सीजन की मात्रा है जो सूक्ष्मजीवों को जैविक गंदगी को सड़ाने में लगती है।

  • इसे 5 दिनों में 20°C पर मापा जाता है।

  • BOD जितना अधिक, पानी उतना गंदा।


✅ 5.1.3 सी.ओ.डी. (COD) और इसका महत्व

  • COD (Chemical Oxygen Demand) वह ऑक्सीजन की मात्रा है जो सभी कार्बनिक और अकार्बनिक गंदगी को रासायनिक रूप से ऑक्सीकरण करने में लगती है।

  • जल्द परिणाम देता है, जबकि BOD में 5 दिन लगते हैं।

  • अधिक COD = अधिक प्रदूषण।


✅ 5.1.4 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानक

  • सीवेज ट्रीटमेंट के बाद पानी में निम्न मानदंड पूरे होने चाहिए:

    • BOD ≤ 30 mg/L

    • घुले ठोस ≤ 50 mg/L

    • pH = 6.5 से 9.0

  • यह नदियों और मिट्टी की रक्षा के लिए जरूरी है।


✅ 5.1.5 सीवेज ट्रीटमेंट के उद्देश्य

  1. ठोस कचरे को हटाना

  2. BOD और COD को कम करना

  3. रोग फैलाने वाले जीवों को नष्ट करना

  4. पुनः उपयोग योग्य या सुरक्षित डिस्पोज़ल लायक बनाना


✅ 5.1.6 पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का फ्लो डायग्राम

→ स्क्रीनिंग → ग्रिट रिमूवल → प्राथमिक अवसादन (Sedimentation) → जैविक उपचार (Aerobic/Anaerobic) → द्वितीयक अवसादन → स्लज का उपचार → शुद्ध जल का डिस्पोजल

🔷 5.2 सीवेज का उपचार (परिचय)

✅ 5.2.1 स्क्रीनिंग

  • पहला चरण: बड़ी वस्तुएं जैसे प्लास्टिक, कपड़ा आदि हटाना।

✅ 5.2.2 स्क्रीन के प्रकार

  • मोटे स्क्रीन (Coarse) – बड़ी वस्तुएं

  • महीन स्क्रीन (Fine) – छोटे कण


✅ 5.2.3 ग्रिट रिमूवल

  • रेत, पत्थर आदि भारी कणों को हटाने की प्रक्रिया।


✅ 5.2.4 स्किमिंग

  • तैलीय पदार्थ, साबुन का झाग आदि को सतह से हटाना।


✅ 5.2.5 अवसादन (Sedimentation)

  • ठोस पदार्थों को टंकी में बैठने देना ताकि वे तल में जम जाएं।


✅ 5.2.6 एरोबिक और एनएरोबिक प्रक्रिया

  • Aerobic: ऑक्सीजन की उपस्थिति में जैविक पदार्थ टूटते हैं।

  • Anaerobic: बिना ऑक्सीजन के सड़न होती है (जैसे स्लज डाइजेशन)।


✅ 5.2.7 स्लज डाइजेशन

  • जमा हुआ गंदा पदार्थ (Sludge) को बैक्टीरिया द्वारा सड़ाया जाता है और गैस बनाई जाती है।


✅ 5.2.8 ट्रिक्लिंग फिल्टर

  • एक गोलाकार टैंक जिसमें प्लास्टिक/पत्थर होते हैं।

  • पानी इन पर गिरता है और बैक्टीरिया जैविक गंदगी को खाते हैं।


✅ 5.2.9 एक्टिवेटेड स्लज प्रक्रिया

  • हवा और बैक्टीरिया मिलाकर टंकी में गंदगी को साफ किया जाता है।

  • स्लज को रिसायकल भी किया जाता है।


✅ 5.2.10 सीवेज का निपटान

  • नदियों, खेतों में या पुनः उपयोग के लिए।


✅ 5.2.11 ऑक्सीडेशन पॉन्ड

  • सूरज की रोशनी, शैवाल और बैक्टीरिया की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रीटमेंट।


✅ 5.2.12 ऑक्सीडेशन डिच

  • एक गोल गड्ढा जिसमें लगातार हिलाकर और हवा देकर उपचार किया जाता है।


✅ 5.2.13 सेप्टिक टैंक

  • घरों के नीचे लगे टैंक जहां घरेलू सीवेज का आंशिक उपचार होता है।


✅ 5.2.14 घरेलू गंदे पानी का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग

  • बगीचे में पानी देना, फ्लशिंग, उद्योगों में उपयोग आदि।

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